दर्द का एक समंदर है। जीसका कोई छोर नजर नही आता! सिसकता रहता है। अपने आपमे आह तक नही करता........ जी़ंदगी के अनगीनत अनसुलझे अहसासों का बोझ यह ढोता है। गम के घनघोर अंधेरे मे यह चुपचाप सा रहता है। बेजुबान सा एक फकीर है । ना जाने कीन गलीयो मे घुमता है।
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